अध्याय 180

हर एक सेकंड जैसे अनंत में खिंचता जा रहा था। कैटनिस को अपने ही दिल की बेतहाशा धड़कन सुनाई दे रही थी, और ठंडा पसीना उसकी कमीज़ की पीठ को भिगो रहा था।

आखिरकार फेलिक्स परछाइयों से बाहर निकला—कदम धीमे, नपे-तुले—और उनके बीच की दूरी घटाने लगा। वह कुछ फुट दूर आकर रुक गया। धुंधली रोशनी में उसकी एक-ही सही आँ...

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